
हम
रह नयी हम चलते
मलय पवन से बहते
जुड़ें नेह के रिश्ते
चाह यही हम रखते।
चंदा से हम चमके
फूलों से हम महके
डाह कभी न आये
चिड़ियों से हम चहके।
हर पल ऐसे जीते
सुख-दुख में मिलकर रहते
उलझन न होती कोई
हम खुशी से देखो रहते।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान

हम
रह नयी हम चलते
मलय पवन से बहते
जुड़ें नेह के रिश्ते
चाह यही हम रखते।
चंदा से हम चमके
फूलों से हम महके
डाह कभी न आये
चिड़ियों से हम चहके।
हर पल ऐसे जीते
सुख-दुख में मिलकर रहते
उलझन न होती कोई
हम खुशी से देखो रहते।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान