
कलम तलवार से तेज
सच लिखती बेधड़क
गाँव की आवाज़ बनकर
दिल्ली तक पहुँचे बात
झूठ के महल गिरती
इंसाफ़ दिलाती रोज़
ये कलम की ताकत है
सबको जीना सिखाती
रोज़ जीवन में
नई उमंग लाती
गलत सही का फर्क बताती
आम आदमी को
खास बनती
कलम की ताकत
हमे रोज़ एक कदम
जीवन के आगे बढ़ती
नई उमंगे, नई नीति ,
नया उत्साह लाती
ये कलम है , जनाब
हर वक्त कुछ नया सिखाती
चाहे रात हो या दिन
ये कभी नहीं कतराती
ये कलम है
तलवार की तरह
अपना हर बार आगे बढ़ाती
कलम जब थामो
तो एक हथियार बनाओ
शायद एक कलम से
तुम पूरा संसार बचाओ
कलम है
हमारी पहचान,
कलम है
हमारी जान ।।
– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




