
चाँद –सितारों वाली रात
दादी सुनाती पारियों की बात
राजा – रानी , जादू – मंतर
आंखों में बसता बचपन
नींद कहाँ, बस सुनते जाएं
कहानियों में खोते जाएं
दादी सुनाती हमको किस्से
जिसमें पापा का बचपन आए
दादी सुनाये ऐसी कहानियां
जो हमारा मन विचलित भी कराए
काश सुनाती मेरी दादी भी मुझे
वो हर किस्से
जो सुनते हैं सब बच्चे
काश होती मेरी दादी
में भी रोज़ रात
सुनती नई कहानी
ना देखा उनको
पर बहुत सुंदर होंगी वो
काश होती तो में भी सुनती
वो हर किस्से
दादी के साथ
रोज़ एक नई कहानी सुनती
नए सपने सजती
काश मेरी भी दादी होती
आज में भी काश को
सच समझती
दादी की कहानियां
कभी भी होती पुरानी
उसमें छुपा होता है
उनका आशीष।।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्यप्रदेश)




