साहित्य

परिचय

पूनम त्रिपाठी 

जो परिचय हो गया उसे अपरिचित कर नहीं पाए

 

कि हम एहसास के सागर को सीमित कर नहीं पाए

 

चाहा बहुत कि इन रिश्तों को किसी मोड़ पर रोक लें

 

पर इस दिल के रास्तों को हम कहीं मोड़ नहीं पाए

 

हर मुलाक़ात में बस एक ही एहसास बढ़ता गया

 

और अपने ही दिल को हम कभी समझा नहीं पाए

 

कभी सोचा था दूरियाँ हीअब इलाज बन जाएँगी

 

मगर नज़रों से उसकी सूरत हम हटा नहीं पाए

 

वक्त के साथ सब कुछ बदलता गया दुनिया में

 

पर हम अपने ही जज़्बात को कभी बदल नहीं पाए

 

वो जो थे कभी सिर्फ एक नामके लिए हमारे साथ

 

आज उन्हें अपने दिल से भी निकाल नहीं पाए

 

कहने को बहुत कुछ था मगर खामोश रह गए

 

और इस खामोशी को हम कभी तोड़ नहीं पाए

 

जो रिश्ता बन गया था अनजाने एहसासों से

 

उसे चाहकर भी हम कभी उनसे तोड़ नहीं पाए ll

 

पूनम त्रिपाठी

गोरखपुर ✍️

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!