साहित्य

प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक 

 डॉ गीता पाण्डेय

मंगल कारक है बने,महावीर हनुमान।

इस जग में परमार्थ से,इन्हें मिली पहचान।

राम सिया के भक्त बन, करते रहते कर्म,

इनके पथ का अनुसरण, करो सभी इंसान।।

 

मिला जन्म सौभाग्य से,दिए विधाता दान।

महिमा अपरंपार है,चलो करें गुणगान।

श्रद्धा पूरित भाव से, जो करता है भक्ति,

उसके सिर पर हस्त रख, प्रभु देते वरदान।।

 

कलि काल बड़ा दुर्दांत है, भटक न जाना राह।

कपट पूर्ण हर चाल से, देता दर्द अथाह।

समय अभी है चेत लो,प्रभु से करिए प्रीति,

जिस पर करते प्रभु कृपा,दूर उसी की आह।।

 

लक्ष्य साधकर इस जगत,करो पंथ आसान।

अटल हौसला रख गढ़ो, नए-नए सोपान।

साहस संयम धैर्य से, मंजिल आती पास,

कर्म स्वयं करना पड़े, फल देते भगवान।।

 

डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता

सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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