साहित्य

जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तह तैसी

डॉ रामशंकर चंचल

मेरा राम, कण कण में बसा राम ,हर मानव मात्र में , पशु पक्षी में बसा राम
हर देश में विश्व में बसा राम, राम जो माननीय सोच, चिंतन के साथ सम्पूर्ण विश्व का कल्याण करता हूं और सभा मानव मात्र को सुख सुकून देता है , राम जो एक आदर्शों का , अच्छाइयों का अहसास रात , राम करुणा और दया में रमा राम , राम जो सदियों से धरती जन्म से चला आ रहा राम, राम जो एक शक्ति है , ताकत है, आत्मा विश्वास है
राम कोई साधारण नहीं है दुनिया को चला रहा राम है, किसी जाति धर्म राजनीति का राम नहीं मानव मात्र का हर व्यक्ति के दिल में आत्मा में राम ,राम है
काश यह दुनिया राम को समझ पाती काश यह दुनिया राम के चरित्र को अमल करती
हर अच्छाइयों में , हर शुभ कर्म में , हर संवेदनशील व्यक्ति के मन और आत्मा में बसा राम है
राम एक अद्भुत ऊर्जा है, राम एक अहसास है जो मात्र दिल से आत्मा से पूर्ण आस्था से अहसास किया जीवन पूंजी है, जीवन सार्थक मंत्र है
राम क्या नही है, राम की ही दुनिया है फिर भी पता नहीं क्यों इंसान राम की तलाश में भटकता है दौड़ लगता हैं जबकि हर मानव मात्र में समाहित है राम और वही राम तो है जो उसे जिन्दा रखें सक्रिय रखें ऊर्जा ताकत प्रदान कर जीवन सार्थक कर रहा है
राम जो कभी कृष्ण बन कर्म पाठ पड़ता हैं इसी तरह राम ही अनेक रूप में, नाम में सभी में विराजमान हैं
आवश्यकता है आपके भीतर विराजमान राम को पहचानने और सतत् कर्म पथ पर दस्तक देने के साथ विश्व कल्याण की भावना से जीवन सार्थक कर अपने राम का दिया यह अद्भुत ईश्वरीय उपहार मानव जीवन को सुकून सुकून से जीते हुए पूरा करें

अंत में यही कहना चाहता हूं कि जकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत पाई तह तैसी , बस अपने भीतर विराजमान राम को पहचानने और सतत् कर्म पथ पर दस्तक देने के साथ मानव जाति के हित में सोचे जो हर मानव मात्र पशु पक्षी सभी के लिए हितकारी हो, देखेंगे हर पल आपके राम को अपने पस दिल में आत्मा में और अजीब सुख सुकून महसूस करेंगे

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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