साहित्य

विधा गीत

एस के कपूर

मानव तेरे ही भीतर बैठा है भगवान।

क्यों बना हुआ है तू इस बात से अनजान।।आ

त्म परमात्मा सब ही मनुष्य के अंदर हैं।

जिसे आभास हुआ प्रभु का जीवन चंदन है।।

क्यों प्रभु से कट बैठा जीवन उसीका वरदान।

मानव तेरे ही भीतर बैठा है भगवान।।

**

तेरे व्यक्तित्व का वस्त्र तेरी ही शालीनता है।

तेरे संस्कारों का पता भी तेरी ही कुलीनता है।।

पूजता भगवान को संकट में मानुष है नादान।

मानव तेरे ही भीतर बैठा है भगवान।।

**

तेरे कर्मों का सब हिसाब भगवान रखता है।

तेरी कथनी करनी की भी वह ध्यान रखता है।।

सुनता जा अंतरात्मा की केवल तू बन जा इंसान।

मानव तेरे ही भीतर बैठा है भगवान।।

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रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली।।

©. @. skkapoor

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