
जन्म दिवस की अशेष बधाइयाँ सुधीर भैय्या। आपका जीवन खुशियों से भरा रहे। आप साहित्य के आकाश पर सूरज बनकर चमकते रहें।
सुधीर भैय्या से मैं औपचारिक रुप से कभी नहीं मिली हूँ लेकिन अपने अनुभव से कह सकती हूँ कि कभी – कभी आभासी रिश्ते जाने-पहचाने, देखे-भाले रिश्तों से अधिक प्रगाढ़ और सच्चे होते हैं । ऐसा ही रिश्ता है मेरा सुधीर भैय्या के साथ; हमेशा बड़ी दीदी का सम्मान देते हैं मुझे।
मेरा पहला ऑनलाइन एकल एक घंटे का काव्यपाठ नवसाहित्य परिवार के पटल पर हुआ था जिसके भैय्या शायद संरक्षक थे। मुझे थोड़ी शंका भी थी कि पटल पर ठीक से एंटर हो पाऊँगी या नहीं, मगर उन्होंने आधी घंटे पहले स्वयं ही फोन करके सारी चीजें समझा दी और बोले, दीदी प्रोग्राम से पंद्रह मिनट पहले एक बार एंटर करके देख लीजिए और सबसे अपील कर आइये कि दस मिनट बाद आप कार्यक्रम लेकर आ रही हैं । निमंत्रण भी हो जायेगा और पटल पर आपका ट्रायल भी। मैंने वैसा ही किया और प्रोग्राम भी बहुत अच्छा रहा ।
सुधीर भैय्या बड़े ही सहयोगी स्वभाव के हैं। एक और घटना का जिक्र करती हूँ; एक बार एक तथाकथित साहित्यकार बार -बार फोन / मैसेज कर रहा था कि उसे मेरा इंटरव्यू लेना है और मैं इतनी रकम उसे भेजूँ । मेरे बार-बार मना करने के बावजूद उसके निरंतर मैसेज आ रहे थे। मैंने इस बारे में भैय्या से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा फोन नं. दे दीजिए उसे और कहिए कि मेरे भैय्या से बात करें। वे कहेंगे तो इंटरव्यू दे दूॅंगी ।
मेरे अनदेखे, आभासी मगर आत्मीय सुधीर भैय्या शतायु हों, स्वस्थ रहें।
***मधु माहेश्वरी गुवाहाटी असम



