
जलाकर ज्ञान की मशाल, अँधेरा दूर किया तुमने,
नारी के उत्थान का, संकल्प मजबूत किया तुमने।
खोले किताबों के पन्ने, तोड़े रूढ़ियों के बंधन,
ऐसी महान शिक्षिका को, बारंबार है हमारा वंदन।
समाज ने फेंके पत्थर, ताने भी अनगिनत कसे,
मगर चट्टान-सी अडिग रहीं, हौसले न टूटे तेरे।
पति ज्योतिराव के संग, कारवां नया बनाया,
दलित और वंचितों को भी, पढ़ना-लिखना सिखाया।
छुआछूत का जहर मिटाकर, सबको एक सा माना,
मुक्तिदात्री कहलाईं तुम, सबका जीवन संवारा।
काव्य फुले की रचना कर, ज्ञान का सागर बहाया,
मज़लूमों के हकों को, अपनी कलम से लिखाया।
प्लेग की महामारी में, मरीजों की सेवा की बहुत,
खुद को न्योछावर कर दिया, मिटा दी हर विपद।
तेरा यह त्याग और तपस्या, युगों-युगों तक याद रहेगी,
भारत की हर बेटी, तेरी सदा ऋणी रहेगी।
हम सब मिलकर गाएँगे, तेरी ही विजय की गाथा,
तू ही है भारत की नारी, की सच्ची भाग्य-विधाता।
स्वरचित रचना
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश
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