
मधुर वचन महिमा अति प्यारी
सरल – सहज लगते हितकारी ।
हृदय कलुष सब दूर भगाए।
नफरत जनगण की मिट जाए।।
मधुर वचन जन को हरता है।
महक सदृश मन को भरता है।।
मृदु सुर सुलझन को सुलझाती।
कुटिल जलन दिल आग बुझाती।।
मनुज अधर पर ये सजते हैं।
मुनि ऋषि सुर इसको भजते हैं।।
पिक स्वर मधु मन को लगते हैं।
सकल सपन उर में जगते हैं ।।
मृदुल वचन दुनिया प्रभु भाए।
उतर नजर जन शीघ्र सुहाए।।
रसिक सुमन सम ये मन छाए।
गजल कलम नगमे प्रिय गाए।।
डॉ मंजु गुप्त
वाशी , नवी मुंबई




