साहित्य

आनंदित जीवन 

डॉ. प्रभा जैन

मन में जीओ और जीने दो, भावना

खुश रहो खुशियाँ बांटो,

सुख दुःख है जीवन पुष्प

व्यस्त-मस्त रहो,अस्तव्यस्त ना हो।

 

आनंदित जीवन जीना है,

जो मिला,स्वीकार करो,रखो

सतकर्म-सकरात्मकविचार,

सांस-सांस पर रहे प्रभु नाम।

 

है वो चित्रकार,रंग भरता

रखता कर्मों का हिसाब,

क्षमा-परिश्रम-लगन-सत्य-

दया-त्याग-संतोष स्नेह से दोस्ती कर लो।

 

रहना नहीं सदा यहाँ

मन अंतस रखो खिला- खिला

हँस लो खुलकर और हँसाओ

परहित जीवन जी लो जरा।

 

डॉ. प्रभा जैन  ” श्री ”

देहरादून

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