साहित्य

दोहा

किरण कुमारी

रिमझिम- रिमझिम रात भर ,गाती गीत फुहार।

झींसी -झींसी बूँद यूँ , छेड़े मन के तार।।

 

नींद उड़ा कर ले गई, छम -छम सी बरसात।

झिलमिल- झिलमिल याद में,लगी बहकने रात।।

 

धड़का जाए चित्त को, संभालेगा कौन।

इत-उत रह- रह डोलता,सड़क गली है मौन।।

 

रात सुहानी हो गई, हिय क्यों है बेचैन।

हलचल अंदर है बहुत ,किसे ढूँढता नैन।।

 

लरी -लरी हर बूँद में, भरी हुई है प्रीत ।

संग- संग भू पर गिरे, प्रीत रही है जीत।।

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