
रिमझिम- रिमझिम रात भर ,गाती गीत फुहार।
झींसी -झींसी बूँद यूँ , छेड़े मन के तार।।
नींद उड़ा कर ले गई, छम -छम सी बरसात।
झिलमिल- झिलमिल याद में,लगी बहकने रात।।
धड़का जाए चित्त को, संभालेगा कौन।
इत-उत रह- रह डोलता,सड़क गली है मौन।।
रात सुहानी हो गई, हिय क्यों है बेचैन।
हलचल अंदर है बहुत ,किसे ढूँढता नैन।।
लरी -लरी हर बूँद में, भरी हुई है प्रीत ।
संग- संग भू पर गिरे, प्रीत रही है जीत।।




