साहित्य

आया मौसम बरसात का

सुषमा श्रीवास्तव

आया मौसम बरसात का, तपिश बुझाए गर्मी की,

आया मौसम बरसात का, प्यास बुझाए वसुधा की।

कृषकों के चेहरे खिल जाते,मन में प्यारी आस जगाते,

आशाओं की बेल फैलती, कल जो खुशियाँ आने की।

संदली माटी ख़ुशबू देती,तन-मन प्रफुल्लित होए,

बालकों का उत्साह दैखते बनता, पीछे भागते नाव के।

धरती पर अंकुर फूटें, पत्ता-पत्ता हरिया जाए,

धुल-धुल कर चमक उठे जड़ चेतन, इस जग-जीवन के।

धन-धान्य शस्यश्यामला धरती प्राकृतिक मनुहार की।

रसोईं से ख़ुशबू उठती, गरम पकौड़े-चाय की।

आया मौसम बरसात का,

लाए नेह-बौछार की,

तन भीगे,मन भीगे संग-संग,आस लगी प्रिय आवन की।

दादुर,मोर, पपीहा बोले, सुर-संगम बने जीवन की।।

देखो लाया कितने सौगात,

आया मौसम बरसात का!!

 

सुषमा श्रीवास्तव,मौलिक सृजन,©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।। 09-07-26

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