साहित्य

चंदन

ममता झा मेधा 

चंदन शीतलता की पहचान है,

धूप में भी महकता अरमान है।

तेरे स्पर्श से माथा शीतल हो जाए,

मन का हर ताप तुझसे मिट जाए।

 

वन-वन भटके तुझे पाने को लोग,

तेरी खुशबू से मिटे हज़ारों रोग।

साधु-संत तिलक तेरा लगाते हैं,

देवों की मूर्ति तुझसे सजाते हैं।

 

काटे जो भी तुझे, तू उसे भी महकाए,

दुश्मन को भी सुगंध से नहलाए।

यही तो तेरी सबसे बड़ी सीख है,

तकलीफ में भी औरों को शांति देती है।

 

चंदन-सा जीवन जीना मुश्किल है,

पर चंदन-सा बनना मुमकिन है।

जलन को भूल, महक बनकर जिएं,

दुनिया में चंदन-सी पहचान बनाएं।

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ममता झा मेधा

डालटेनगंज

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