दीनबंधु हो विष्णु जी,शंख चक्र है शान।
दूर करें संत्रास सब,करते कृपा महान।
पूर्ण करो मम आस प्रभु,विनय करूंँ कर जोड़,
करना प्रभु इतनी कृपा,बनी रहे पहचान।।
लोभी बनकर मत जियो,मानवता हो साथ।
कभी किसी के सामने,मत फैलाओ हाथ।
मांँगो केवल ईश से, जो जीवन आधार,
देते छप्पर फाड़ के,हरि हैं दीनानाथ।।
हर युग में अवतार ले,किए दुष्ट संघार।
ऐसे प्रभु की कीजिए,सदैव जय-जय कार।
भक्तों पर करते कृपा,रखते सबका ध्यान,
इस नश्वर संसार के,हरि हैं पालनहार।।
रामकृष्ण सब नाम हैं ,एक विष्णु भगवान।
कष्ट मिटाते हैं सभी,भक्त करें गुणगान।
क्षीर सिंधु में वास है, शेषनाग शुभ सेज,
इस धरती पर दूसरा,हरि के नहीं समान।।
डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




