
घुटनों के बल
नापा है उसने
ब्रह्मांड अपना,
अदृश्य शक्ति के
उदात्त ताकत से
सात फीट की दूरी
उसके लिए
सात समंदर पार थी।
न कोई शब्द,
न कोई भाषा
बस एक जिद थी—
उस खिलौने को पाने की,
उसके भीतर हौसले का
एक बीज बोया
ईश्वर ने चुपके से
माँ-बाप तो बस
सीखने के बाद
ताली बजाते हैं,
पर वह नन्हा पंछी
बिना किसी नक्शे के
अपनी पहली उड़ान
भरता है ।
ईश्वर प्रदत्त हौसलों से
© ललन प्रसाद सिंह
वसंत कुंज, नई दिल्ली-70




