
स्वर्गीय सासू मां राम किशोरी देवी अवस्थी को कोटि-कोटि नमन, अर्पित श्रद्धा सुमन, क्यों साथ छोड़ा।
सांसु माँ आपने,19 जुलाई 1985 को देवलोक गमन किया, जग छोड़ा।
हुआ दुख आघात,सांसु माँ आपने क्यों ,परिवार को तन्हा छोड़ा।
सब परिजनों से ,ममता स्नेह का नाता क्यों तोड़ा।
आपने प्रिय जनों को, रोता बिलखता छोड़ा ।
यह दुखद आधात सबने झेला, जो प्रगति में बना रोडा़।
दिन -रात ,आपकी यादों के पीछे मन दौड़ा ।
आपका सहारा छूटा ,अकेलेपन ने परिजनों को तोडा़।
आघात के प्रहार ने दिया दुख गहन, सुख को निचोड़ा।
आनंद और मन के चैन का नाता टूटा, नहीं कैसे भी गया जोड़ा।
आपकी याद में हर पल, दिल पर पड़ता है दुखद हथोड़ा।
छिन गई मुस्कान ,आपने क्यों दुनिया से मुंह मोड़ा।
आपके जाने से हुए हम अधूरे, पड़ा आघात का हथौड़ा ।
घर के कोने- कोने के सौंदर्य को, आपने श्रम से था जोड़ा ।
आपका रूठना सहन होता नहीं, क्यों नहीं आपने ,सबका कान मरोड़ा ।
घात लगाकर मृत्यु ने आप पर आधात किया ,आपने असमय जग छोड़ा।
हमने साथ रहने की, अपेक्षा करी, आपने की उपेक्षा ,ले गया आपको यमराज काल- घोड़ा ।
कोटि-कोटि नमन ,अर्पित श्रद्धा सुमन ,आपने क्यों स्नेह नाता तोडा़।
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रचयिता
बहू-डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश




