
मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ में अजीवन व्यतीत करने वाले सालो से कितने ही आमंत्रण प कभी शहर नहीं छोड़ा और तो और जो शहर में भी कभी कभी दस्तक देता है घर और एकांत में घूमना नित्य सालों से सुख सुकून महसूस करता है जिसने दो पत्नी बच्चा और एक पोता जैसे अमुल्य संपति खो दी आज वह देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम बन गया है डॉ रामशंकर चंचल जिसे मिला इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित चर्चित रूह प्रेम कथाओं की कालजयी कृति वो गली वो मकान पर दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कृतियों में शामिल कृति को अमृता प्रतीम सम्मान दुनियां के दस हजारों द्वारा बधाई बंटोर चुका है धन्य धरा झाबुआ सचमुच वंदनीय है सादगी लिए सहज सरल व्यकित्व डॉ रामशंकर चंचल जिसने सैकड़ों युवा पीढ़ी को प्रेरित कर अद्भुत इतिहास रचा है




