साहित्य

सावन गीत

आशा बिसारिया

सावन सुरीला आगया,अगवानी कीजिए

मौसम रंगीला आ गया,अगवानी कीजिए

सावन…..

ये कारे-कारे मेघा,छम-छम बरसता पानी

धरती से मिलने आ गया…

दामिनी दमक रही है,पपीहा पुकारता है

चातक भी सुर मिला गया..

सूखे थे जो सरोवर,सिमटी थीं जो तलैंयां

उनमें उफान आ गया….

दिन में कमल विहँसते औ’रात में कुमुदिनी

सारस का जोड़ा आ गया…

देखे जो कारे मेघा , तो नाचता मयूरा

कान्हा की सुधि दिला गया…

गाएंँ मल्हार सखियां पींगें बढ़ा२ के

पीहर बड़ा मन भा गया….

चूड़ी हरी हरी हैं और लाल २ मेंहदी

गजरा भी गजब ढा गया…

सावन……..

आशा बिसारिया चंदौसी

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