
पांच सालों की सतत् साधना और तपस्या का दूसरा नाम है डॉ रामशंकर चंचल, सादगी और सहजता और सरलता का नाम है डॉ रामशंकर चंचल जिसने अपनी फ़क़ीरी मैं जीते हुए सदा ही सैकड़ों दुःखो को दर किनारे करते हुए आज एक ऐसा मुक़ाम पाया है जो सदियों याद किया जायेगा आदर और सम्मान से जो सदियों जिन्दा रहेगा साहित्य जगत में देश और दुनिया में साहित्य के झाबुआ मध्य निवासी डॉ रामशंकर चंचल नाम से
यह कोई साधारण बात नहीं है यह सत्य स्वीकार करना होगा जो आज सारा मीडिया प्रिंट और सोशल मीडिया प्रतिदिन हजारों चाहने वालों के लिए पढ़ा और सुना जाता हैं लाखो युवा पीढ़ी के प्रेरणा बने हुए डॉ रामशंकर चंचल ने सारी जिंदगी साहित्य सेव को समर्पित कर दी
विरले होते है ऐसा इंसान जो सालों में जन्म लेता है जिनके साथ सदा मां सरस्वती विराजमान रहती हैं भाषा में कर्म में बोलने और मानव मात्र सभी को सत् प्रणाम करते हुए आदर देने में
कहां है आज ऐसे लोग दुलर्भ हैं यह सत्य भी मानना होगा
चाह अगर है, जुनून है, आस्था और आत्मा विश्वास है तो फिर जाति धर्म ऊँच नीच अमीर गरीब
शहर,गांव पद और धन आदि आदि सैकड़ों बातें व्यर्थ है आदरणीय डॉ रामशंकर जी जी ने यह अद्भुत सत्य सामने रखते हुए आज सैकड़ों के प्रेरणा बन गए हैं
धन्य हुआ झाबुआ मध्य प्रदेश की पावन पवित्र धरा वंदनीय हो गई देश और दुनिया में छाई हुई सदियों जिन्दा रहेगी




