साहित्य

गीत सृजन  सावन आने वाला

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

ढलता जाय अषाढ़ महीना, सावन आने वाला है।

प्यासे मन के आँगन में अब, प्रेम बरसने वाला है।।

 

घिर-घिर आए काले बादल, नभ पर छाए प्यार लिए,

शीतल सी पुरवाई आई, मन में मधुर बहार लिए।

मोर पिया की तान सुनाकर, नाच मचाने वाला है,

प्यासे मन के आँगन में अब, प्रेम बरसने वाला है।।

 

सूखी डाली, सूखे सपने, फिर देख हरियाने लगे,

भीगी माटी की खुशबू से, सारे मौसम गाने लगे।

रिमझिम बूँदों का मधु-संगम, मन महकाने वाला है,

प्यासे मन के आँगन में अब, प्रेम बरसने वाला है।।

 

रूठे रिश्ते फिर मुस्काएँ, नेह-दीपक जलने लगे,

मन के सारे विरह-अँधेरे, प्रेम-रस से ढलने लगे।

जीवन-वीणा का हर स्वर अब, गीत सुनाने वाला है,

ढलता जाय अषाढ़ महीना, सावन आने वाला है।

प्यासे मन के आँगन में अब, प्रेम बरसने वाला है।।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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