
मित्र बनायें सोचकर, जिससे मिले विचार।
सुख-दुख में जो साथ दे, उत्तम हो व्यवहार।।
मीत वही सच्चा हुआ, दे विपदा में साथ।
जब भी स्थिति दयनीय हो,कस कर पकड़े हाथ।।
जो बराबरी का रहे, बनें उसी के मित्र।
साथ निभायेगा सदा,छिड़क भाव का इत्र।।
विपदा में देता सदा,धन-दौलत फिर साथ।
ऐसे मित्रों से सदा, ऊँचा उठता माथ।।
‘गौरा’ सच्चा मीत ही, हरता मन का ताप।
रखिये उसे सहेज कर, जीवन भर ही आप।।
#पार्वती_देवी ‘गौरा’ देवरिया
“लोग जो साथ रहते हैं,सभी न दोस्त होते हैं।
जो पक्के दोस्त होते हैं,सभी अलमस्त होते हैं”।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐




