साहित्य

आँसू

निवेदिता सिन्हा

आँसू तेरी होती अनकही कहानी ।
खुशी हो या गम तेरे स्वरूप में ,
आँख में आ जाये पानी ।

आँसू तेरा अलग फ़साना ।
मिलन हो या विरह तेरा हर हाल में ,
आँखो से है बह जाना ।

आँसू तू न होता तो दर्द कैसे कम होता।
माना दर्द खत्म न होता पर तेरे बहने से,
दिल कुछ हल्का महसूस करता ।

आँसू तेरा आँखों से गहरा रिश्ता ।
खुशी या गम हर माहौल में,
आँखों का साथ देने तू छलकता ।

निवेदिता सिन्हा
गया जी, बिहार

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