साहित्य

सर्द दिसम्बर की हवा

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता 'गुंजन'

सर्द दिसम्बर की हवा, शीतलता चहुँओर।
दिनकर निकले देर से, प्राची मंडल छोर॥(१)

कुहरे की चादर लिए, वसुधा है अति मौन।
बूँद ओस की अब दिखे, मौसम है अति रौन॥(२)

हरियाली है बाग़ में, नील वर्ण आकाश।
खगगण कलरव मग्न हैं,चारो ओर प्रकाश॥(३)

सर्द सुहावन मखमली, दिवस लगे चितचोर।
मनभावन है मुँगफली, मादकता चहुँओर॥(૪)

गुंजन डोले बाग में, चातक करता शोर।
मन मयूर है नाचता, उपवन दिखे चकोर॥(५)

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज (इलाहाबाद)
संपर्क सूत्र 9452252582
इंस्टाग्राम – arjun_prayag

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