साहित्य

लालच बुरी बला है..(बाल-कहानी)

जयचन्द प्रजापति 'जय'

एक समय की बात है, एक किसान ने अपना गेहूं बोरे में भरकर गोदाम में रख दिया। घर में रहने वाले सारे चूहे उस अनाज को देखकर बहुत खुश हो गए। उन्होंने सोचा, “वाह! कितना सारा भोजन है! अब रोज़ आराम से खाएंगे।”

चूहों ने मिलकर किसान की गेहूं की बोरी को काट दिया और रोज़-रोज़ उस अनाज का आनंद लेने लगे। लेकिन उनमें से एक बूढ़ा चूहा था, जो समझदार और सोच-समझकर काम करता था।

उसने चूहे दोस्तों से कहा, “भाइयों, इतना गेहूं खाना ठीक नहीं है। किसान का नुकसान हो रहा है, और अगर हम इतने लालची रहेंगे, तो हमें बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। हमें संयम रखना चाहिए।”

पर बाकी चूहे उसकी बात नहीं मानते थे। वे लालच में पड़कर गेहूं खाते रहते। धीरे-धीरे किसान ने देखा कि उसका बहुत सारा अनाज गायब हो रहा है।फिर एक दिन किसान ने योजना बनाई।

उसने अपने गेहूं में जहर की पुड़िया मिला दी। जब सारे चूहे ज़हर वाला अनाज खाने लगे, तो वे बीमार होकर मरने लगे।लेकिन बूढ़ा चूहा अपनी समझदारी से अपनी भूख पर नियंत्रण रख पाया। उसने जहर नहीं खाया और अपने जीवन को बचा लिया।

………..
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज

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