
19वीं सदी में लोग संयुक्त परिवार में रहते थे।
आपस में मिलजुल कर एक छत के नीचे खाना खाते थे।
आपस में मिलजुल कर रहते थे।
एक दूसरे से बात करते थे।
मन में नहीं होता था कोई गिला शिकवा।
नहीं आती थी मन में उदासी।
बहुत ही खुशहाल जीवन जीते थे।
मन में होता था प्रेम प्यार भाईचारा अपनापन का।
21वीं सदी आती हें।
परिवार का होने लगा विखंडन।
एकल परिवार के सारे रहते हैं।
बहुत ही उदासी अकेलेपन में रहते हैं।
मोबाइल का सहारा लेते हैं।
पूरा दिन बिताते हैं।
ना आपस में रहा प्रेम प्यार ना रहा भाईचारा अपनापन।
केवल रहा मोबाइल बीवी और बच्चे।
यह भी दिन देखने को बुजुर्गों को मिलते हैं।
बहुत ही कठिनाइयों से जीवन व्यापन होता है।
अब तो मोबाइल ही उनका एक सहारा है।
समाज, रिश्तेदारों से दूरी हो गई है।
मोबाइल से ही प्रेम प्यार भाईचारा अपनापन जताते हैं।
#सुरेन्द्र कुमार बिन्दल कलमकार जयपुर।




