साहित्य

पापा का डर – एक आत्मकथा

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

“डर” – एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह काँप उठती है। लेकिन अपनों का डर एक अलग ही प्रकार का डर होता है – जिसमें भय भी होता है और प्रेम भी।

अपनों का डर, डराने के लिए नहीं, बल्कि हमें संवारने और सुधारने के लिए होता है। यह डर वास्तव में भय नहीं, प्रेम होता है। क्योंकि अगर कोई अपना हमें डर दिखाता है, तो वो केवल हमारी भलाई के लिए होता है।

मैं अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा हूँ। जितना मैं अपने पापा जी से डरता हूँ, उतना मेरा कोई भाई या बहन नहीं डरता। और आज भी, मैं डरता हूँ।

मुझे बचपन की एक घटना याद है – एक बार मैंने चुपके से अपने चाचा जी के कुछ सिक्के निकाल लिए थे और दुकान पर जाकर कुछ चीजें खरीद ली थीं। शाम को जब चाचा जी ने अपने पैसे कम पाए, तो उन्होंने पापा जी से कहा कि शायद मैंने पैसे चुराए हैं।

पापा जी ने मुझसे पूछा – “क्या तुमने पैसे चुराए?”
मैंने मना कर दिया।
चाचा जी ने कहा – “कोई बात नहीं, शायद खर्च हो गए होंगे।”

लेकिन पापा जी कहां मानने वाले थे – उन्होंने डंडा उठाया और मेरी पिटाई शुरू कर दी।
मैं भाग गया। लेकिन वो मेरे पीछे-पीछे भागते रहे और मारते रहे।

मैं रोते हुए घर आया। जोर-जोर से रो रहा था।
मम्मी ने उन्हें रोका, लेकिन पापा कहाँ मानते?
क्योंकि मैं अपनी गलती मान ही नहीं रहा था।

तभी मेरी दादी जी ने पापा और चाचा – दोनों को डांटा और मुझे बचाया।
मैंने अपनी दादी के सामने अपनी गलती मानी और वादा किया कि भविष्य में फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा।

दादी जी ने मुझे समझाया –
“बेटा, इस तरह किसी की भी चीज़ चुपके से नहीं लेनी चाहिए। हमेशा पूछ कर लेना चाहिए।”

उस दिन से, मैंने कभी किसी की भी कोई चीज़ बिना पूछे नहीं ली।
आज जो कुछ भी हूँ, वो उसी डर और सीख की वजह से हूँ।
अगर पापा जी ने उस दिन ऐसा सख्त रुख न अपनाया होता,
तो शायद आज मैं वो न बन पाता जो हूँ।

निष्कर्ष

मैं तो यही कहूँगा कि –
अपनों का डर भी हमारे जीवन में ज़रूरी होता है।
वो हमें सही दिशा दिखाने में मदद करता है।

आजकल जिन परिवारों में बच्चे बड़ों से डरते नहीं, वहाँ कहीं न कहीं भारतीय संस्कृति का ह्रास हो रहा है।

मैं तो अपनों के डर को डर नहीं, प्यार समझता हूँ,
जिसका हमारे जीवन में होना अनिवार्य है।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’, चंदोसी, उ०प्र०

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!