साहित्य

जो बातें दिल में रहती हैं

दया भट्ट दया

बहुत कुछ कह न पाए हम,
मगर ये मान लेना तुम—
जो बातें दिल में चुभती हों,
उन्हें हम कह नहीं पाते।
दीपक बुझते-बुझते भी
थोड़ा उजाला दे जाते…

कभी-कभी ख़ामुशी में भी
मन अपनी बात सुनाता है,
पर होंठों से गिरने से पहले
हर जज़्बा थम-सा जाता है।
हम दर्द लिख भी दें चाहे,
कुछ आँसू पढ़ नहीं पाते—
जो बातें दिल में चुभती हों,
उन्हें हम कह नहीं पाते…

चलो आज तुम बैठो पास,
सांसों को थोड़ा रुकने दो,
पलकों में उतरे जो मौसम
उनको धीरे से बहने दो।
रिश्तों में पड़ चुके पर्दे
नज़र से नज़र नही आते —
शब्दों से पहले भी कुछ-कुछ
धड़कती हैं, धड़कनें बताते …

हम सब अपने-अपने डर में
अपने सच से घबराते हैं,
कुछ सपने आधे–टूटे से
दिल में ही रह जाते हैं।
कहने को तो सब कहते हैं,
पर हम कह नहीं पाते—
जो बातें दिल में चुभती हों,
उन्हें हम कह नहीं पाते…

*दया भट्ट दया, खटीमा, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड)*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!