
भूल जा अब दिखें लौट आ लौट आ,
प्यार आ के जता लौट आ लौट आ।
रात तू याद में आ गया कुछ सुना,
क्यों फिजा को सता लौट आ लौट आ।
जख्म दिल के जले मैं अकेली सही,
दर्द से यूँ हटा लौट आ लौट आ।
भीड़ में होश खो कर उदासी मिली,
बेबसी को मिटा लौट आ लौट आ।
राह में खुशबुएँ संग अब तक खड़ी,
मन सुमन का सजा लौट आ लौट आ।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




