
” सिंदूर 1 “
* माँ सीता
अपने शृंगार कक्ष में थी
अचानक उनके कक्ष में
हनुमंत जी पहुँच गए
जो राम दरबार और
राम परिवार के
परिवार जन ही थे
मारूतिनंदन ने देखा
माँ जानकी शृंगार प्रसाधनों के
उपयोग के पश्चात
अब माथे पर सिंदूर
लगा रहीं थी
आंजनेय ने पूछा
माता! यह क्या है,
क्यों लगा रही हैं?
माँ वैदेही ने प्रत्युतर दिया
इससे प्रभु प्रसन्न होते हैं
हनुमान जी सोच में पड़ गये
जब एक चुटकी सिंदूर से
प्रभु राम इतना खुश हो जाते हैं
तो क्यों नहीं पूरे शरीर पर
सिंदूर का लेपन किया जाये
प्रभु अत्यंत प्रसन्न हो जायेंगे
कुछ समयांतराल पर
महावीर उपस्थित थे
माँ सीता के समक्ष
माँ के हर्ष,विस्मय
और वात्सल्य का पारावार
नहीं था।
” सिंदूर 2″
सिंदूर की
अस्मिता की रक्षा हेतु
इतिहास गवाह है कि
पुरुषों ने अद्भुत रणकौशल
और अपार शौर्य का
प्रदर्शन किया है
भारतीय नारियों ने भी
कुछ जगहों पर
कदम से कदम मिलाकर
साथ दिया
पर इसमें विशद रूप में
एक कृष्ण पक्ष भी है
उनके हजारों की संख्या में
आत्मबलिदान या जौहर का
यह भी कालांतर में
सती-प्रथा मे तब्दील हो गया
उस समय के परिप्रेक्ष्य में
भले यह त्याग था
पर यह सिंदूर;
संघर्ष और सती-प्रथा की
परिभाषा बन गयी थी
तब राजा राम मोहन राय का
वंदन,अभिनंदन जिन्होंने
इस कारुणिक सती प्रथा से
मुक्ति दिलाई
और इतिहास के इन
रण-गाथाओं में
हम जब भी चूके तो
सिर्फ मतभेद के कारण।
” सिंदूर 3″
पहलगाम मे
बाइस अप्रैल को
जो हुआ या आतंकवादियों द्वारा किए गए
वह मानवता के इतिहास में
बदनुमा दाग की तरह
सर्वदा के लिए अमिट हो गया
वह बर्बरता का तांडव नृत्य था
स्वाभाविक था कि आने वाले दिनों में प्रलय
दस्तक दे रहा था
द्वापर होता तो क्षणांश में
वासुदेव के कनिष्ठा मे
सुदर्शन चक्र नाच रहा होता
खैर राक्षस वध तो होना ही था
चाहे जरासंध मरे,
शिशुपाल या घटोत्कच।
” सिंदूर 4 “
सिंदूर का रंग भी
लाल होता है
जब इसे मिटाओगे
तो धरती तो लाल
होनी है
हमारा गौरवशाली इतिहास है
सहिष्णुता यदि हमारे स्वभाव में है
तो एकता और शौर्य
हमारी पूंजी है
जब भी मानवता
शर्मसार होगी
तो निमित्त जनों का
विनाश सुनिश्चित है।
” सिंदूर 5″
हमें अपने नेतृत्व और
अपने को सदैव
हर विषम परिस्थितियों में
स्वयं को हमेशा समर्पित
करने वाले जांबाज सेना पर
गर्व है
जिन्होंने आपरेशन सिंदूर के
नेपथ्य घोष में ही
तहलका मचा दिया
हमारे हथियार भी
बेजोड़ साबित हुऐ
दुश्मन और उसके सहयोगी देशों
के हथियारों की
कलई खुल गई
हिल गये बड़े बड़े देश
और उनके तथाकथित सूरमा
अभी तो यह आरंभ है
आगे आगे देखिए
होता है क्या।
रविशंकर शुक्ल




