
चलो थोड़ा रूमानी हो
जाए,
मौसम भी थोड़ा सर्द
हो गया,
हवाओं मे भी मादकता है
और,
चांदनी भी सर्द है,
तारे भी सिमत गए,
चलो थोड़ा घूम आए,
देखो… देखो तो ,
कैसे,
तारे मिलने को बेताब
हो रहे हैं,
चांदनी भी मचल रही है
मिलने को,
तुम्हारे सोंदर्य का,
दीदार करने को,
चलो थोड़ा घूम आए
इस,
सर्द हसीन वादियों मे ,
चलो थोड़ा रूमानी हो
जाए …….।
शशी कांत श्रीवास्तव
डेरा बस्सी मोहाली, पंजाब



