
बने जगत के श्रेष्ठ प्रवर्तक नतमस्तक हुआ समाज ।
कर्म योग के बने उपासक संपूर्ण जगत में राज।।
अमर सत्य साधक बनकर के नव युग किए विस्तार ,
विवेकानंद तेज पुंज थे साजे थे सारे साज।।
अपने आदर्श व्यक्तित्व से किया सुसंगठित था मेल।
शिकागो सम्मेलन में गई फैल सद विचार की बेल।।
युवा वर्ग के प्रेरणा स्रोत रामकृष्ण थे गुरु इनके,
जिन की छत्रछाया में किए दिव्य दर्शन का शुभ खेल।।
प्रज्ञा भरी अपार थी जिसमें चेहरे पर मुस्कान अमंद।
नवोन्मेष की व्याप्त कल्पना लाल बसन धारे कमरबंद।
भरे चेतना मानवता की किए प्रसारित विश्व पटल ,
दार्शनिक मनीषी सुखद स्मरण पूज्यनीय विवेकानंद।।
गए शिकागो सम्मेलन में धर्म ध्वजा था फहराया।
राष्ट्र नमन वंदन करता है भारत का मान बढ़ाया।
सारा जीवन किया समर्पित देश सदा ही ॠणी रहेगा,
परम संत विवेकानंद को सत्य सनातन ही भाया।।
दिशाहीन अब हुई जवानी युवा करें जग में मनमानी।
मात-पिता की कभी न सुनते जो है मूरख अज्ञानी।
भटका मानव तूफाँ जैसा बीज मजहबी है बोता,
बनो विवेकानंद सरीखे करो नहीं अब नादानी।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




