दिल्ली NCR

डा. अभि दा के जन-उपयोगी कार्यक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बटोरी सराहना

चलो स्वर्ग की ओर” : घर बैठे आत्मिक उत्थान का सरल मार्ग

 

दिल्ली के सुप्रसिद्ध बहुआयामी व्यक्तित्व डा. अभि दा द्वारा संचालित जन-उपयोगी कार्यक्रम “चलो स्वर्ग की ओर” का विगत दिनों 4 दिसंबर एवं 11 दिसंबर 2025 को दो भागों में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभा साहित्य मंच पर लाइव प्रसारण किया गया। यह कार्यक्रम आत्मिक उन्नयन, जीवन-मूल्यों की पुनर्स्थापना तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य यह संदेश देना था कि स्वर्ग कोई दूरस्थ या काल्पनिक लोक नहीं, बल्कि हमारे दैनिक आचरण, विचार और व्यवहार में निहित अवस्था है। डा. अभि दा ने सरल, सहज और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि बिना किसी आर्थिक व्यय के, केवल कुछ सामान्य निजी परिवर्तनों—जैसे सत्यनिष्ठा, करुणा, संयम, सेवा-भाव, सकारात्मक सोच और संस्कारयुक्त जीवन-शैली—को अपनाकर हर व्यक्ति स्वर्गसमान जीवन का अधिकारी बन सकता है।

पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रह चुके डा. अभि दा एक विख्यात कवि, प्रशंसित अभिनेता, पदक विजेता गायक, पदक विजेता फोटोग्राफर, प्रसिद्ध लेखक एवं प्रेरक वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनके बहुआयामी अनुभवों ने इस कार्यक्रम को और भी प्रभावी बनाया। उन्होंने प्रशासनिक जीवन, साहित्य, कला और सामाजिक अनुभवों से जुड़े प्रसंगों को जोड़ते हुए विषय को अत्यंत रोचक और आत्मीय रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आज के पश्चिमोन्मुख परिवेश में भारतीय समाज, विशेषकर युवाओं के सामने खड़ी नैतिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति किसी बंधन का नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर, संतुलित और सार्थक बनाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। “चलो स्वर्ग की ओर” कार्यक्रम इसी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक संदर्भों में सहज रूप से प्रस्तुत करता है।

लाइव प्रसारण के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में दर्शकों की सहभागिता रही। श्रोताओं और दर्शकों ने कार्यक्रम को प्रेरणादायक, जीवन-परिवर्तनकारी और आत्मिक शांति प्रदान करने वाला बताया। सोशल मीडिया और मंच पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं में कार्यक्रम की विषयवस्तु, प्रस्तुति शैली और संदेश की व्यापक सराहना देखने को मिली।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभा साहित्य मंच के पदाधिकारियों ने भी इस आयोजन को मंच के उद्देश्य—साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के वैश्विक प्रसार—के अनुरूप बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों के आयोजन की इच्छा व्यक्त की।

निःसंदेह, “चलो स्वर्ग की ओर” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आज के तनावग्रस्त जीवन में मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का आह्वान है। यह पहल यह सिद्ध करती है कि यदि संदेश सच्चा और सरल हो, तो वह घर बैठे भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की लहर पैदा कर सकता है।

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