
भारत समृद्ध देश है, खास -अलग पहचान।
सोने की चिड़िया बना, फिर से हिंदुस्तान ।।
नर -नारी हर क्षेत्र में, चलते हर क्षण संग।
बदल रही है रीत यूँ, भरें दिशा में रंग।।
सड़क दिखे हर ग्राम में ,
दिखता पूर्ण विकास।
भू से लेकर व्योम पर ,जले दीप की आस।।
आत्मनिर्भर बन युवा, करें देश का नाम।
जाल नशे का काटकर, लिखे सुनहरी शाम।।
निर्धन बूढ़े लोग के, साथ खड़ी सरकार।
भ्रात कृषक को भी दिए ,खुशियों का उपहार ।।
भारत अब आगे बढ़ा, पीछे हुआ विदेश।
देख प्रगति सब जल रहे ,नोच रहे हैं केश।।
किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर




