
दिव्य गंगा सेवा मिशन
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गंगा केवल जलधारा नहीं, संस्कार है,
इसके कण-कण में बसता हमारा विचार है।
हरिद्वार की धूल में सेवा का उजास है,
यहाँ कर्म ही पूजा, यही सच्चा आचार है।
दीप जलाने से बढ़कर जल को बचाना सीखें,
श्रद्धा की यही सबसे सुंदर दरकार है।
न नारा, न दिखावा, न कोई व्यापार है,
सेवा का यह पथ ही मिशन का आधार है।
स्वच्छता में संवेदना, श्रम में सम्मान है,
दिव्य गंगा सेवा मिशन का यही उच्चार है।
जो आज गंगा को निर्मल रखने में लगा है,
वही आने वाले कल का रखवाला परिवार है।
कलम जब झुकी गंगा-माँ के पावन चरणों में,
शब्द-शब्द बन गया जैसे कोई सत्कार है।
कहे ‘दिलकश’ नमन कर, श्रद्धा के इस भाव में,
दिव्य गंगा सेवा मिशन—मेरा शत-शत आभार है। 🌊
*दिनेश पाल सिंह दिलकश*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*




