गरीबी और गरीब सा जीवन: डॉ. सत्य प्रकाश
गरीबी का अर्थ क्या है? दैनिक जीवन की सामान्य जरुरत हेतु निरंतर कर्मशील बने रहने की मज़बूरी और स्वास्थ्य हेतु आवश्यक भोज्य पदार्थ और दवा सुविधा के लिए अतिरिक्त तनाव का वातावरण। घर परिवार के बच्चे हेतु पढ़ाई-लिखाई और घूमने-फिरने के लिए नितांत जरुरत भर केंद्रित रहने की स्थिति को मध्यम जीवन स्तर मानना चाहिए जबकि ऐसी सभी जरुरत को बिना तनाव लिए, बिना पूछे जब परिवार के सदस्यों द्वारा मनमाना खर्च करने की स्थिति हो और सहायक नौकर भी हर काम के लिए उपलब्ध हो सकें या रहते हों उसे अमीर की संज्ञा दी जा सकती है। हर स्त्री पुरुष के लिए भवन-स्वामी होना एक आवश्यक विषय वस्तु होती जा रही है, जबकि धरती का पर्यावरण इसके लिए इजाजत नहीं दे रहा। घर भी अगर एक से बढ़ कर एक बनने की स्थिति हो तो दबाव और अधिक।
इसलिए अमीर और गरीब की संज्ञा और धारणा में हम सब को परिवर्तन करना पर्यावरण के हित में होगा। चिंतन यह कहता है कि यदि तीस से पैतिस साल की उम्र में पहली किताब लिखने भर की समझ आ जाये और चालीस- पैतालिस तक आप लेखक समाज में बैठने की स्थिति में आ जाएँ और पचास की उम्र में आपकी पुस्तकों को सौ-दो सौ पुस्तक पढ़ने वाले लोग, आपकी कलम से आपको पहचान कर आपको प्रसन्न होने का अवसर दें तो समझ लीजिये कि आप अमीर हैं।
यह हमारा जीवन, अगर तीस से पचास आयु वर्ष के बीच; विचारों के जंगल में रम गया, तो जीवन की बहुत सारी गैर जरुरत की चीजों को सोचने महसूस करने और दुख दर्द से नाता खत्म हो जाये ऐसा सोचने का अवसर समाप्त हो जाएगा। आपको पसंद करने वाले आपकी तरह के लोग आपको जिंदगी का लुफ्त देंगे मगर सावधान रह कर इस अमीरी का आनंद लेने आना चाहिए। यह अंदरूनी ताकत और असीम अमीरी का जरिया है जो आपके जाने के बाद भी दुनियाँ में आपकी अमीरी को बताता रहेगा।
डॉ. सत्य प्रकाश
वैज्ञानिक विचारक
संपादक एवं लेखक



