
जन्म जीवन कि अनवरत अनंत सृष्टिगत प्रक्रिया परम्परा में प्रतिदिन जाने कितने प्राणी जन्म लेते है तो कितने काया का त्याग कर जन्म जीवन के कठिन चक्र से मुक्ति कि अनुष्ठान प्रक्रिया प्राण प्राणी पराक्रम के अंतर्गत जीवन का त्याग कर कर्मानुसार नए जीवन यात्रा पर निकल पड़ते है!
स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय सृष्टि कि इसी अनंत प्रक्रिया परम्परा के मानवीय काया में जन्म जीवन उद्देश्य के कर्तव्य एवं दायित्व से भिज्ञ का जन्म उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के गोरखपुर जनपद में सरयू के सानिध्य अहिरौली
में उस समय हुआ था ज़ब आर्यब्रत में मलेक्छा कि लम्बी गुलामी से स्थानांतरण होकर गुरुण्ड कि गुलामी से अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत था!
ऐसी राष्ट्रीय सामाजिक स्थिति परिस्थिति में अति पिछड़े राज्य उत्तर प्रदेश के अत्यंत पिछड़े पूर्वांचल के गोरखपुर के बढ़हल गंज कस्बे के समीप जन्म लेकर शिक्षा दीक्षा ग्रहण करना सामान्य ब्राह्मण कृषक परिवार के युवक के लिए तत्कालीन समय में कठिन चुनौती थी वह भी ऐसे काल खंड में ज़ब गुरुण्ड अपनी वैश्विक सत्ता शक्ति के मद में चूर पूर्वांचल के युवकों क़ो उनकी दरिद्रता, अशिक्षा के कारण गुलामी कि क्रूरता के ताकत से गिरमिटिया मजदूर बनाकर ऐसे द्विपो में लें जा रहे थे जहाँ जीवन जीना दुर्भर था!
ऐसी दुरूह चुनौतिपूर्ण काल खंड में स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी द्वारा ब्राह्मणत्व के कर्तव्य शिक्षा ज्ञान ग्रहण करने में आपने सीमित संसाधन के बावजूद प्राप्त अति सीमित संसाधन सुविधा का उपयोग शिक्षा प्राप्त करने में किया गया!
शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत सन उन्नीस सौ बसाठ में उत्तर रेलवे में सहायक स्टेशन मास्टर का पद भार ग्रहण कर राष्ट्र एवं समाज सेवा के जीवन कर्म अनुष्ठान का शुभारम्भ किया गया
सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में मुरादाबाद मंडल बिभिन्न स्टेशनो पर कार्य करते हुए बैंक एंड मूमेंट इंस्पेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण कार्यों क़ो परिणाम तक पहुंचाया जिससे वास्तविकताओ एवं सच्चाई क़ो देखने का अवसर मिला जिसके कारण उनके अथक प्रयास के परिणाम में लक्सर उपभोक्ता एवं विक्रेता सहकारी समिति समाज कि उतपत्ती हुई जिसके माध्यम से स्थानीय समाज क़ो आत्म निर्भर बनने में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया!
उत्तर रेलवे में के नार्दन रेलवे के मजदूर संगठन नार्दन रेलवे के मेंस यूनियन के बिभिन्न संगठनिक दायित्वों का निर्वहन गुरुता गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करते हुए केंद्रिय उपाध्यक्ष के उच्च दायित्व क़ो मर्यादित एवं सुशोभित किया!
उत्तर रेलवे के मजदूर संगठन के कर्मठ सक्रिय एवं संस्कारिक कार्यकर्ता के रूप में स्वर्गीय रमेश चंद्र पांडे के नेतृत्व कौशल क्षमता कि कठिन परीक्षा थी वर्ष 1974 में राष्ट्र व्यापी रेल हड़ताल!
सरकार द्वारा नैतिकता एवं संविधान द्वारा मौलिक प्रदान किए गए मौलिक अधिकार का हनन करते हुए हड़ताली कर्मचारियों क़ो सेवा से बर्खास्त कर दिया गया जिसमे स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी भी थे!
ऐसी दुरूह कठिन एवं चुनौतिपूर्ण समय में स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी ने धर्मेव जयते, कर्मेव जयते, धर्मेव जयते के कुरुक्षेत्र मे भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए गीता सन्देश क़ो आत्म साथ करते हुए दृढ़ता साहस एवं धैर्य का परिचय देते हुए सब्जी बेचकर एवं ट्यूशन पढ़ा कर आपने बच्चों कि शिक्षा क़ो नियमित रखते हुए परिवार का भरण पोषण करने कि जिम्मेदारी का निर्वहन किया गया इतने चुनौतिपूर्ण समय में भी स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी द्वारा ना तो मजदूरों के हक से कभी कोई समझौता किया ना ही संगठनिक हितो से सापेक्ष कोई समझौता किया!
स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय क़ो पारिवारिक विरासत संस्कार के रूप में जो ऊर्जा, आत्म शक्ति, नैतिकता, मर्यादा, एवं मानवता कि अकक्षुण अक्षय शिक्षा शक्ति पूर्वजों द्वारा प्राप्त थी जो जन्म से जीवन पर्यन्त तक स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय के लिए जीवन का संबल सिद्धांत एवं शौर्य पराक्रम पुरुषार्थ के आधर एवं मौलिक जीवन सिद्धांत थे!
स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी परिवार समाज एवं रिश्तो नातों के प्रति अति संवेदनशील जागरूक थे उनके इन्ही सद्गुगुणों ने उन्हें आपने छोटे भाई
स्व रामअनंत क़ो पढ़ाया और इंजीनियर बनाया आपने साले राम प्रताप मिश्र क़ो रेलवे में सेवारत होने का शुभ अवसर प्रधान करने में अहं भूमिका का निर्वहन किया जिनकी दुर्भाग्य बस सेवा काल में मृत्यु के कारण उनके सुपुत्र धर्मेंद्र तिवारी अनुकम्पा के आधार पर रेल सेवा में है!
स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय जी कि धन्य धरोहर उपलब्धियों मे अपनी बहन के सुपत्र भांजे ब्रह्मानंद तिवारी क़ो बी एस सी एवं बी एम एस कि शिक्षा आपने पास रखकर आपने खर्चे से दिलाई बड़े साले के पुत्र डॉ प्रमोद पाण्डेय कि शिक्षा में सहयोग किया जो आर्थिक सामयिक वैचारिक के साथ पूर्णता सम्पूर्णता के साथ था!
13 जनवरी -2025 क़ो लम्बे जीवन कि अनुभूति अनुभवो कि गहराई कि गंगोत्री से गंगासागर तक कि यात्रा गहराई क़ो आपने अंतर्मन में समेटे अवनी पर आपने प्रवास के पराक्रम पुरुषार्थ कि धन्य धरोहरों के परिणाम क़ो छोड़ प्राणी प्राण के मोक्ष महायज्ञ अनुष्ठान के जन्म जीवन के अगले पड़ाव क़ो महाप्रयांण कि महा यात्रा के महर्षि जन्म जीवन निर्वाण के उत्सव उमंग उल्लास के उत्कर्ष के सत्य सर्ग स्वर्गीय रमेश चंद्र पांडे जी युग काल के पल प्रहर संध्या निशा प्रभात दिवस माह वर्ष दर वर्ष मानवता मानवीय मूल्यों सामाजिक सरोकार के शाश्वत प्रत्यक्ष जीवेत जाग्रत अनमोल अस्ति अस्तित्व थे!
जीवन के अंतिम समय में भी स्वर्गीय रमेश चंद्र पाण्डेय वर्तमान कि दुःख पीड़ा से अनभिज्ञ आपने अतीत अस्तित्व के पुरुषार्थ क़ो सोचते खोजते समय काल नीति नियत क़ो सजोते पोषते इसी प्रयास पराक्रम मे काया का त्याग किया कि जैसे शयन बिस्तर से उन्मुक्त स्वतंत्रत होकर औषधि के आडम्बर से दूर आपने उत्कृष्ट शिकर उत्कर्ष क़ो पर पुनः जीवेत जाग्रत करते महानिर्वाण कि यात्रा पथ पथिक महान संत परम्परा के प्रकाश उजियार पौहारी शरण जी महराज का भक्त शिष्य आपने कुल काल परिवार परम्परा का महान कर्मयोद्धा कर्मयोगी आदर्श अस्तित्व काया में भले ही न हो किन्तु आपने मूल्यों,चिंतन, आदर्शो, नैतिकता के जन्मेजय के स्वरूप में शोभायमान है!
मै ऐसे संत मनीषी काल समय वक़्त अभिमान वास्तविकता के पराक्रम के पुरुष पुरुषार्थ क़ो हृदय के पवित्र भाव से श्रद्धांजलि
पुष्पांजलि एवं भावान्जली अर्पित इस सकारात्मकता सार्थकता के विश्वास के साथ करता हूँ कि उनकी पीढ़ी परिवार द्वारा उनके जीवन मूल्यों क़ो जीवंत जाग्रत रखते हुए समय समाज काल समय में उनकी कीर्ति पताका क़ो अम्बर में अभिमानित होने का अवसर प्रदान करते रहेंगे!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!




