
सुरों की सरगम से एक गीत सुनाऊँ आज,
राष्ट्र-नव निर्माण की नींव रखने वाले राज।
युग-प्रवर्तक अटल जी का जन्मोत्सव महान,
सुशासन दिवस बन कर करता जग को ज्ञान।
माँ भारती ने जिनको उज्ज्वल तिलक लगाया,
विराट व्यक्तित्व का धनी, भारत ने पाया।
हिंदी के कवि, निर्भीक पत्रकार, प्रखर वक्ता,
वाणी में ओज, विचारों में शाश्वत सत्ता।
भविष्यद्रष्टा थे वे, दूरदर्शी नेतृत्वशील,
नीतियों में समाया राष्ट्रहित का हर एक सूत्रशील।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गाँव जुड़े,
किसानों के हित में आयोग बने, सपने सजे।
स्वर्णिम चतुर्भुज से देश की राहें सजीं,
आर्थिक सुधारों से अर्थव्यवस्था नई ऊर्जा पगी।
पोखरण की धरती से शक्ति का उद्घोष हुआ,
विश्व पटल पर भारत का मस्तक ऊँचा हुआ।
नदियों को जोड़ने का देखा समग्र स्वप्न,
पीढ़ियों के हित में रचा विकास का यज्ञ।
विदेश नीति में संवाद, शांति का संदेश दिया,
गठबंधन धर्म निभा लोकतंत्र को सुदृढ़ किया।
अटल जी स्वयं में एक संस्थान बनकर उभरे,
मर्यादा, करुणा और सिद्धांतों में सदा निखरे।
सन् दो हजार पंद्रह में भारत रत्न से सम्मानित,
राष्ट्र ने किया गौरवशाली प्रणाम अर्पित।
तिरानवे की अवस्था में लिया युगपुरुष ने विश्राम,
पर विचारों में आज भी जीवित है उनका नाम।
भारत की इस महान विभूति को शत-शत नमन,
अटल रहें आदर्श आपके, करता यह युग वंदन।
डॉ॰ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




