साहित्य

उसके ग़म और इश्क़

कनक

उसके ग़म और इश्क़ में ही जिया करते थे
धोखे फ़रेब में नहीं प्यार किया करते थे।।

उसने कबूल भी किया था फ़िर जाने क्यूं वो
दूर रहकर मुझसे भी तो गिला करते थे।।

पास रहकर न मुझे भी सकून था लेकिन
मरते दम तक हम भी प्यार किया करते थे।।

आशियाने न मिले तब कुछ उलझा ही था
वक़्त बेकार था मेरा भी मिला करते थे।।

देखकर हम उनको भी हमेशा जलते
उसके ग़म ज़ख़्म भी देखो तो भरा करते थे।।

ख़बर ख़्याल रखता हूं मैं सदा ही उसका
जिन्दगी में अब यारों वो सुला करते थे।।

दामन थामा हमने भी अपने कनक सदा
चूम सकते शिर उसका तो भुला करते थे।।

कनक

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