
अटल थे उनके विचार,
अटल थी उनकी वाणी
कलम में था राष्ट्र, उनका
आँखों में थी कहानी।
शब्द नहीं थे केवल उनके
भाषण थी उनकी रवानी,
हर पंक्ति में थी वन्देमातरम
भारत था उनके जुबानी।
राजनीति में रहकर भी लिखते थे मन की भाषा
कवि थे, कविता थी अद्भुत
कठोर समय में भी वो धर्यवान और संवेदनशील।
रहे शत्रु से भी संवाद कर
के आसान राह बनाई,
यही थी उनकी सबसे
बड़ी चतुराई।
हिमालय-सा ऊँचा
उनका व्यक्तित्व,
गंगा-सा पावन
उनका व्यवहार।
लोकतंत्र को दिया
नया संस्कार,
भारत को दिया
सशक्त आधार।
हार में भी उन्होंने
हार न मानी,
सत्ता से ऊपर
रखी नैतिकता।
अटल नाम ही नहीं था
केवल उनका,
जीवन भी था अटल—विचारों की सत्यता।
आज भी जब भारत बोलता है गर्व से,
उनकी आवाज़ हवाओं
में घुल जाती है।
अटल जी, आप युग-पुरुष थे,
आपकी कविता—आज भी देश गुनगुनाती है।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️




