
गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्र थे,
जो साहिबजादे कहलाते थे,
बड़े पुत्र अजीतसिंह का जन्म,
माता सुंदरी देवी से हुआ था,
जुझारसिंह, जोरावरसिंह,
फतेहसिंह माँ जीतो से जन्में थे।
1704 में इन साहिबजादों ने,
धर्मयुद्ध की बलि वेदी पर
अपना बलिदान दिया था,
सर्वस्व निछावर किया था।
अजीत सिंह, जुझार सिंह ने
चमकौर के युद्ध में मुगलों से
वीरतापूर्वक लड़ते हुए ख़ुद
के प्राण न्योछावर किये थे।
जोरावर सिंह, फतेह सिंह,
जो मात्र 9 और 7 वर्ष के थे,
सरहिंद के नवाब ने बंदी बना
जिंदा दीवार में चुनवा दिये थे।
चारों युवा शहीदों साहिबजादों
का सर्वोच्च बलिदान इतिहास में,
अद्वितीय है और आज भी महती
प्रेरणा और श्रद्धा का स्रोत है।
भारत के इन बीर बालकों को
याद करने और श्रद्धांजलि देने
के लिए 26 दिसंबर को वीर
बाल दिवस मनाया जाता है।
आदित्य देश उन बीर शहीद
साहिबजादों को इस बाल-
दिवस पर शत – शत नमन
और विनम्र श्रद्धांजलि देता है।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ




