स्वास्थ्य

एंग्जाइटी ….. एक दर्दनाक मानसिक अवस्था

डॉ रुप कुमार बनर्जी

एंग्जायटी एक ऐसी मानसिक अवस्था है जो इंसान के लिए अत्यंत घातक है! यह मस्तिष्क को चोट देने के साथ ही शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। रिश्तों में विश्वास की कमी, एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़ , असुरक्षित महसूस करना, लड़ाई-झगड़ा, ग़लत व्यवहार, अनियमितता, समाज से दूर रहना, अपनी ही जिंदगी में लीन रहना यह सब बेचैनी के कारण हैं। वैसे एंग्जायटी तो हर किसी को होती है परन्तु इसे बीमारी के तौर पर पहचानना मुश्किल है। अगर कोई विशेष नकारात्मक विचार या परेशानी बहुत लंबे वक्त तक बनी रहे और उससे रोजमर्रा की अपनी जिंदगी पर असर पड़ने लगे तो ये वाकई खतरनाक है।
अब एक प्रश्न दिमाग में आता है कि एंग्जायटी होता क्या है? आपको बता दूं कि एंग्जायटी अवसाद, निराशा व दुःख से जन्म लेती है। जब हम अपनी भावनाओं को अनदेखा करते हैं तो वे हमारे दुःख का कारण बनती हैं। ठीक इसी प्रकार, नजरअंदाज किए जाने पर अवसाद एंग्जायटी का रूप ले सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को हर वक्त इस बात का डर लगा रहता है कि कुछ गलत होने वाला है। यह घबराहट के दौरे (पैनिक अटैक) होते हैं। एंग्जायटी के दौरे में व्यक्ति को हर समय चिंता, डर व घबराहट महसूस होती है। इसके अलावा उलटी व जी मिचलाने की समस्या भी महसूस होती है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और सांस फूलने लगती है।
अगर ऐसा बार बार होता है तो अपने चिकित्सक से जरूर संपर्क करें अन्यथा दिक्कत और ज्यादा बढ़ सकती है।

एंग्जायटी के सामान्य लक्षण-
एंजायटी के कुछ सामान लक्षण :- बेवजह की चिंता करना , हृदयगति में बढ़ोत्तरी होना , छाती में खिंचाव महसूस होना , सांस फूलना , लोगों के सामने जाने से डरना , लोगों से बातचीत करने से डरना और उनको शक की निगाह से देखना , लिफ्ट वग़ैरह में जाने का डर कि वापस नहीं निकल पाएंगे , जुनून की हद तक सफाई करना , बार-बार चीजों को सही करते रहना , जीवन से निराश हो जाना , ये सोचना कि मृत्यु निकट है या कोई मार देगा , पुरानी बातों को याद करके बेचैन होना , मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाना अथवा टप टप टप जैसा महसूस होना , फालतू विचारों में बढ़ोतरी होना , बिना कारण के बेचैनी महसूस करना , गैरजरूरी चीज के प्रति बहुत लगाव होना , जल्दी निराश हो जाना , किसी चीज के लिए अनावश्यक आग्रह करना आदि , किसी चिकित्सक के साथ लगकर ज्यादा दिन चिकित्सा ना करवा पाना क्योंकि चिकित्सक पर से बहुत जल्दी विश्वास उठ जाता है।

एंग्जायटी के प्रकार :- सामान्य एंग्जायटी , अनियंत्रित जुनूनी प्रकार , सामाजिक चिंता प्रकार , डर या फोबिया , पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर , घबराहट आदि ।

एंग्जायटी होने के कारण :-
ज़्यादा चिंता करने लगना- छोटी सी छोटी बातों को ज़्यादा सोचना और ऐसा जिंदगी में बार बार होना एंग्जायटी का ही लक्षण है। इसके चलते हम खुद के महत्वपूर्ण कामों को अच्छे से नहीं कर पाते।
2. तनावपूर्ण घटनाएं :- कार्य का बोझ, तनाव, अपने किसी प्रिय व्यक्ति का निधन अथवा प्रेमिका से ब्रेकअप जैसी अविश्वसनीय घटनाएँ आदि।
3. परिवार का इतिहास :- जिन व्यक्तियों के परिवार में मानसिक विकार से जुड़ी समस्याएँ होती रही हैं, उन्हें चिंता विकार की समस्या जल्दी हो सकती है जैसे ओसीडी विकार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जा सकता है।
4. स्वास्थ्य से जुड़े मामले :- थायरॉयड की बीमारी, दमा, डायबिटीज या हृदय रोग आदि। अवसाद से पीड़ित लोग भी एंग्जायटी की चपेट में आ सकते हैं। जो व्यक्ति लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहा हो, उसकी कार्यक्षमता में गिरावट आने लगती है। इससे कामकाज से जुड़ा तनाव बढ़ने लगता है और फिर एंग्जायटी का जन्म होता है।
5. नशे का इस्तेमाल :- पीड़ा, ग़म, मायूसी, उदासी व तकलीफ़ को भुलाने के लिए बहुत से लोग शराब, नशीली दवाओं , अत्यधिक हस्तमैथुन और दूसरे नशों का सहारा लेने लगते हैं। यकीन मानें कभी भी ये चीज़ें एंग्जायटी का इलाज नहीं हो सकते हैं। नशे का इस्तेमाल समस्याओं को और बढ़ा देता है। नशे का असर खत्म होते ही फिर से वही परेशानियां बढ़ने लगती हैं।
6. व्यक्तिव से जुड़े विकार :- कुछ लोगों को पूर्णतः यानी परफेक्शन के साथ काम करने की आदत होती है लेकिन जब ये पूर्णतः की जिद सनक बन जाए तो ये एंग्जायटी के अधीन आ जाता है। यही जिद उन लोगों में बिना वजह की घबराहट और चिंता को जन्म देती है।

एंग्जायटी होने के परिणाम-
1. उत्तेजित हो जाना :- जब कोई बहुत ज्यादा परेशान होता है तो उसका सहानुभूति तंत्रिका तंत्र बहुत तेज़ काम करने लगता है जिसके कारण दिल की धड़कन बहुत तेजी से बढने लगती है, पसीना आने लगता है, हाथ पैर कांपने लगते हैं और मुंह सूखना शुरू हो जाता है।
2. घबराहट हो जाना :- ज्यादा कुछ सोचने पर असहजता और घबराहट होने लगती है जो कि एंग्जायटी का ही एक लक्षण है। यह बहुत हानिकारक हो सकता है।
3. बहुत ज्यादा थकान हो जाना :- जब हमें ज्यादा थकान महसूस होने लगे तो सबसे पहले ये जानना ज़रूरी है कि ये सामान्य फ़ीलिंग है या किसी चिंता की वजह से हो रहा है। यदि इस थकान के कारण सिर दर्द या घबराहट है तो ये एंग्जायटी का एक लक्षण है। ज़्यादा चिंता करने से नींद नही आती और तनाव बढ़ने लगता है।
4. किसी भी बात पर ध्यान देने में मुश्किल होना :- जो लोग ज्यादा चिंता करते हैं, उन्हें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और चिंता से याद्दाश्त पर भी असर पड़ता है।
5. बेवजह का बात बात पर चिड़चिड़ापन होना :-
एंग्जायटी से पीड़ित लोग बहुत ज़्यादा चिड़चिड़े होते हैं। वे बात बात पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन दिखाते हैं जिससे उनका सामाजिक स्तर निम्न हो जाता है। इसी वजह से वे लोगों से दूर हो जाते हैं।
6. मांसपेशियों में तनाव :- मांसपेशियों में तनाव रहने लगता है। व्यक्ति को चिंता के दौरे पड़ने लगते हैं वह खुद को हर जगह असुरक्षित पाता है।
7. सोने में समस्या होना :- एंग्जायटी होने का एक लक्षण यह है कि व्यक्ति सही से सो नहीं पाता। नींद पूरी तरीके से नहीं ले पाने के कारण नींद में सोते हुए गिर जाना या आधी रात में जग जाना यह सब भी एंग्जायटी के लक्षण हैं।
8. घबराहट का दौरा पड़ना :- एंग्जायटी से पीड़ित लोगों को घबराहट का दौरा पड़ने लगता है जिसके कारण दिल की धड़कन बढ़ने लगती है व पसीना आने लगता है।
एंग्जाइटी से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में बच्चे (भ्रूण) को सांस लेने में परेशानी होती है जिससे गर्भपात का ख़तरा बढ़ जाता है। पीड़ित व्यक्ति सीने में जकड़न, उल्टी और ख़ुद पर संतुलन खो बैठने जैसी समस्याओं से घिर जाता है।
9. समाज से कटे रहना :- जिन लोगों को ज्यादा बेचैनी होती है वो सामाजिक स्थितियों से डरते रहते हैं। उन्हें समाज में उठना बैठना अच्छा नहीं लगता है। ऐसे लोगों को लगता है कि समाज उन्हें और उनकी बातों को अहमियत नहीं देगा। इसलिए वह सबके सामने ना जाकर अपनी भावनाओं को तथा अपनी बातों को सोशल साइट जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप ट्विटर इत्यादि के माध्यम से रखते हैं।
10. संतुष्टि का अभाव :- एंग्जायटी से पीड़ित इंसान कभी भी संतुष्टि का अनुभव नहीं कर पाता है। उसे सदा दुख का एहसास होता रहता है और वह संतुष्ट जीवन का आनंद लेने में असक्षम होता है।

एंग्जाइटी पर खुद से कैसे काबू पाया जाए?
यह एक बहुत ही आवश्यक प्रश्न है।एंग्जाइटी डिसऑर्डर के कई रूप हो सकते हैं। ये सामान्य एंग्जाइटी डिसऑर्डर भी हो सकता है और कहीं ज्यादा गंभीर पैनिक डिसऑर्डर भी हो सकता है, जिसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। पैनिक डिसऑर्डर में हम खुद से ही डर सकते हैं। दिल की धड़कन ऊपर-नीचे हो सकती है। कई बार कंपकंपी लगना और पसीना निकलना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
एंग्जाइटी डिसऑर्डर के मरीज को पैनिक अटैक से सबसे ज्यादा खतरा होता है। ये स्थिति होने पर लोगों को लग सकता है कि, उसे साधारण क्रोध आया है। लेकिन पैनिक अटैक कई अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।
1- खुद को बदलने से बनेगी बात :- एंग्जाइटी से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा उपाय स्वस्थ दिनचर्या को अपनाना है। इसमें संतुलित आहार खाना,अल्कोहल और कैफीन का सेवन ना करना और खुद के लिए वक्त निकालना शामिल है। इसके अलावा इन उपायों को उस वक्त अपनाना चाहिए जब एंग्जाइटी की समस्या ने जिंदगी में दखल देना बस शुरू ही किया हो।
2. आज के बारे में सोचें :- हालांकि, ये कहना बहुत आसान है कि आज के बारे में सोचें। लेकिन परेशान हाल इंसान का तो दिमाग ही जैसे थम सा जाता है। वो तय ही नहीं कर पाता है कि उसके लिए सही और गलत की परिभाषा क्या है? उसे लगने लगता है कि यही वो ट्रैक है जिस पर उसे आगे बढ़ते जाना है।
एंग्जाइटी का शिकार इंसान ज्यादातर भविष्य की चिंताओं को लेकर परेशान रहता है। इसलिए भविष्य की चिंताओं को दरकिनार करते हुए आज के बारे में सोचना शुरू कर दें। खुद से पूछें, क्या आज होने जा रहा है? क्या मैं सुरक्षित हूं? क्या मुझे अभी से कुछ करने की जरुरत है?
3. परिस्थिति पर फिर से सोचें :- बेचैनी और घबराहट का हमला होने पर अक्सर इंसान सोचना शुरू कर देता है कि या तो उसे हार्ट अटैक पड़ने जा रहा है या फिर वह मर रहा है। ऐसी हालत में जरुरत मजबूत इच्छाशक्ति के साथ खुद को संभालने की है।
खुद को ये यकीन दिलाएं कि मुझ पर जो पैनिक अटैक हुआ है वह मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकता। ये थोड़ी देर के लिए ही है और मुझे इसके लिए कुछ भी करने की जरुरत नहीं है।खुद को यकीन दिलाइए कि हमारा शरीर बीमारी से लड़ रहा है, जैसे आम लोग रहते हैं वैसे मैं भी रहूंगा। मुझे कुछ होने वाला नहीं है।
4. लंबी सांस खींचें और छोड़े :- एंग्जाइटी का हमला होने पर लंबी सांसें लेना हमें शांत रखने में मदद करता है।यह बेचैनी को कम करने और दिमाग को फिर से ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।
5. खुद को व्यस्त करें :- जब भी बेचैनी महसूस हो, खुद को व्यस्त करने की कोशिश करें। कुछ भी करें लेकिन खाली न बैठें। जैसे खड़े हो जाएं, टहलना शुरू करें। अपनी मेज पर पड़ा हुआ कोई बेकार कागज उठाकर गोला बनाएं और डस्टबिन में फेंक दें। कुछ भी करें, जो दिल में आए वो करें। इससे जो बात आपके विचारों पर हावी हो रही है उसे रोकने के लिए आपको एक रास्ता मिलेगा। थोड़ी ही देर में आप अपने विचारों पर कंट्रोल वापस पा सकेंगे।
6. दिमाग को कंट्रोल करें :- जैसे ही हमारे दिमाग में बेचैन करने वाले ख्याल आते हैं। शरीर सबसे पहले ऊपरी हिस्से को बचाने के बारे में सोचता है, जहां हमारा हृदय और गुर्दे स्थित हैं। बेचैनी की स्थिति को दिमाग पर नियंत्रण पाकर कंट्रोल किया जा सकता है। सच्चे साथी बनकर मदद कर सकते हैं। अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों को कॉल करें या एसएमएस करें। उनसे अपनी हर तकलीफ शेयर करें। दिल खोलकर अपनी बात कहें। यकीन जानिए कि थोड़ी ही देर में आप खुद को बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगे।

होम्योपैथी में भी है इलाज :- होम्योपैथी एक ऐसी विधा है जिससे शारीरिक के साथ ही साथ मानसिक स्तर को भी काउंसलिंग एवं औषधि द्वारा पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है। किसी सुयोग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से मिलकर अपने लक्षणों का बताकर इस बीमारी से पूरी तरीके से निजात पाया जा सकता है।
एंग्जाइटी एक मानसिक अवस्था है और किसी भी प्रकार से ये पागलपन की श्रेणी में नहीं आता है, अतः इसकी चिकित्सा करवाने से पहले इस बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है।

डॉ रुप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक
प्रस्तुतकर्ता:- विनय कुमार मिश्र

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