आत्मचिंतन की पारदर्शी राह, नया वर्ष सिर्फ़ तारीख़ नहीं बल्कि नई सोच का अवसर है
डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

दोस्त, कैलेंडर के पन्ने पलटेंगे, बाजारों में चमक-धमक बढ़ेगी, रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ेंगे, संकल्प लिए जाएंगे , जिम जॉइन करना, वजन घटाना, नई वस्त्र खरीदना, नया फ़ोन लाना, लेकिन क्या सोच रहे हो कि नया साल आयेगा तो सब नया हो जाएगा? क्या तुम अपने बारे में नहीं सोच रहे? तुम्हे भी तो बदलना चाहिए, लेकिन कैसे? क्यों? क्या नए वर्ष में सब नया होगा? नहीं दोस्त, दोस्त भी पुराने होंगे, हम भी पुराने रहेंगे, लेकिन क्या सोचा है कि हमारी सोच भी पारदर्शी होगी, दिलों में कोई मेल नहीं होगा, कोई छल-कपट नहीं बचेगा? यह सवाल हर आम आदमी से है, हर गली-मोहल्ले के उस भाई-बहन से जो सुबह चाय की चुस्की लेते हुए अख़बार पढ़ता है और सोचता है कि कब बदलेगा ये देश, कब आएगा स्वर्णिम युग? लेकिन सच तो यह है कि बाहर की दुनिया तब तक नहीं बदलेगी जब तक हम अंदर से न बदलें, जब तक हमारी सोच के बादल न साफ़ हों, जब तक दिल की नदियां पारदर्शी न हो जाएं।

चलो इस नए वर्ष में कुछ नई सीख लें जो जिंदगी को सचमुच बदल दें, जो हमें नई राह दिखाएं, जो हमें सिखाएं कि बदलाव का पहला क़दम ख़ुद से उठाना पड़ता है। सबसे पहली सीख है आत्मचिंतन करो, रोज रात को 10 मिनट अकेले बैठो, आंखें बंद करो, गहरी सांस लो और पूछो ख़ुद से ,आज क्या ग़लत सोचा? किससे मन में कड़वाहट रखी? क्यों वो पुरानी बात आज भी साल रही है? जैसे नदी का पानी साफ़ हो तो ही उसका बहाव सुंदर लगता है, वैसे ही पारदर्शी सोच से रिश्ते मज़बूत होंगे, ऑफ़िस में बॉस से झगड़ा हो गया तो कल फ़िर वही नाराज़गी मत ले जाना, माफ़ कर दो, बोल दो दिल की बात, कह दो भाई मैं ग़लत था, चलो नई शुरुआत करें, देखना नया वर्ष नई दोस्ती बनेगी। दूसरी सीख है कार्य में परिवर्तन लाओ, नए साल के संकल्प बड़े मत बनाओ क्योंकि वे टूट जाते हैं और निराशा होती है, छोटे क़दम उठाओ जो रोज़ निभा सको सुबह 5 मिनट अनुलोम-विलोम प्राणायाम करो, आयुर्वेद कहता है कि यह मन की अशुद्धियां दूर करता है, शरीर की विषाक्तता निकालता है, फिर एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पियो, यह नई ऊर्जा देगा, फिर एक पुराने दोस्त को फ़ोन करो जिससे सालों से बोलचाल बंद है, कहो भाई याद आ गया, माफ़ी मांगो या सिर्फ पूछो हाल-चाल, दिलों का मेल जोड़ेगा। तीसरी सीख है पारदर्शिता का जादू अपनाओ, झूठ मत बोलो चाहे छोटा ही क्यों न हो, भावनाएं खुलकर व्यक्त करो, घर में पत्नी से झगड़ा हो तो चिल्लाओ मत, बैठो कहो दिल की बात सुनो, बच्चे देखेंगे सीखेंगे, मोहल्ले में पड़ोसी से विवाद हो तो अदालत मत जाओ पहले बात करो, समझो उनकी मज़बूरी, यही तो पारदर्शिता है जो समाज को जोड़ेगी। चौथी सीख है प्रकृति से सीखो, नए वर्ष में पार्क जाओ, पेड़ों को देखो कैसे पुराने पत्ते झड़ते हैं नए आते हैं, तुम भी पुरानी नकारात्मक आदतें झाड़ दो सोशल मीडिया पर नकारात्मक पोस्ट मत शेयर करो, सकारात्मक सोच फ़ैलाओ, कोई भजन सुनो जैसे मोहम्मद रफ़ी साहब का “सुकून मिला तुझे जहां में आकर”, यह दिल को शांति देगा। पांचवीं सीख है संतों की बात याद रखो, स्वामी विवेकानंद ने कहा था उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो, लेकिन लक्ष्य क्या? पहले ख़ुद का सुधार, गांधीजी ने कहा हमें वो बदलाव बनना चाहिए जो हम दुनिया में देखना चाहते हैं, तो पहले ख़ुद बनो वो बदलाव। छठी सीख है परिवार से शुरू करो, नए वर्ष की पहली सुबह पूरे परिवार को बिठाओ, संकल्प लो साथ में कोई मीठा न खाएं बिना व्यायाम के, कोई टीवी ज्यादा न देखें बिना किताब पढ़े, बच्चे कहानी सुनें महाभारत की या रामायण की जो नैतिकता सिखाए। सातवीं सीख है योग और आयुर्वेद को अपनाओ, सरस्वती वंदना करो सुबह, सूर्य नमस्कार करो 5 चक्र, यह न केवल शरीर को मजबूत बनाएगा बल्कि मन को पारदर्शी करेगा, आयुर्वेदिक चाय पियो तुलसी-अदरक वाली जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगी। आठवीं सीख है माफ़ करना सीखो, पुरानी कटुता को क्षमा करो, जैसे भगवान राम ने रावण को माफ़ करने की सोच रखी थी, वैसे तुम भी दुश्मन को दुश्मन मत मानो, प्रार्थना करो उसके लिए। नौवीं सीख है लेखन करो डायरी में रोज़ तीन अच्छी बातें जो हुईं, तीन ऐसी जिन्हें सुधारना है, यह सोच को साफ़ करेगा। दसवीं और अंतिम सीख है विश्वास रखो खुद पर, नया वर्ष सिर्फ़ तारीख़ नहीं बल्कि नई सोच का अवसर है, पुराने हम को अलविदा कहो, नए ख़ुद को गढ़ो, पारदर्शी सोच साफ़ दिल यही असली बदलाव है, चलो इस नए वर्ष में वादा करें हम बदलेंगे तो दुनिया बदलेगी, राष्ट्र बदलेगा, खुशहाली आएगी, जय हिंद।
डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ हरदा मध्य प्रदेश


