
बीत गया जो कल का पन्ना
उसे विदा अब कर देना
नई धूप की पहली किरण से
मन का आँगन भर लेना
नव वर्ष के नव पर्व से
मिटा पुरानी यादों की धूल
नव परिवर्तन के बीज उगाओ
मन से मन मिलते रहें
फिर खुशियों के फूल खिलाओ
टूटे सपने छूटे अपने
उनका अब मलाल नहीं है
राह नई और कदम नए हैं
बचा कोई अब जाल नहीं है
कुंदन जैसा रूप निखरे
जैसे मोतियों से भरा हो थाल
चमक तुम्हारी फैले हर ओर
कलम उठाओ साहस की
भर लो अपनी इन आँखों में
अमिट चमक विश्वास की
जीवन परिपूर्ण हो मेहनत से
हम सबके लिए प्रेरणा बनें
शुभकामना है इस नूतन की
हर दिन एक त्योहार बने
कवि : नीरज तँवर
Mob no : 8901151535




