
लोभ लालच
माया को त्यागना ही
निर्विकारता।
शुद्ध हृदय
जब होता तो आती
निर्विकारता।
सुख-दुख में
समभाव रहती
निर्विकारता।
जब उर में
पले मानवता हो
निर्विकारता।
साधनारत
जिसका जीवन हो
निर्विकारता।
परम लक्ष्य
को प्राप्त करना ही
निर्विकारता।
निर्मल मन
रख तजे विकार
निर्विकारता।
मनोविकार
दूर होते ही आती
निर्विकारता।
निष्काम भाव
से जीवन जीना ही
निर्विकारता।
योग साधना
करने से आती है
निर्विकारता।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश




