साहित्य

अलविदा वर्ष दो हज़ार पच्चीस

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

अलविदा वर्ष दो हज़ार पच्चीस

मित्रो वर्ष दो हज़ार पच्चीस के
अलविदा होने का समय आ गया,
आप सभी का एक प्यार भरा हृदय
जो कभी भी नफरत नही करता।

आपकी एक ख़ुशनुमा मुस्कराहट
जो कभी भी फीकी नही पड़ती,
आपका एक मधुर सा अहसास
जो हमें कभी दुःख नही देता।

हमारा एक अनमोल रिश्ता
जो कभी खत्म नही होता है,
जो पूरे वर्ष मेरे ह्रदय को
अहसास कराता रहा है।

आपकी यादो को सजोये वर्ष के
अंतिम प्रहर में पहुँचे पता नही चला,
आज याद करते हुए महसूस हुआ कि
आवाज से कारवाँ नही रुका करते,
क्योंकि देखा यह भी जाता है
कि वास्तव में पुकारा किसने है!

आदित्य आशा है आने वाले नए
वर्ष दो हज़ार छब्बीस में भी आप
सभी की आवाज की मधुर झंकार
यूँ ही मेरे कानों में गूँजती रहेगी।

आप सभी को नव वर्ष दो हज़ार
छब्बीस अत्यंत शुभ, मंगलमय हो,
ढेरों ख़ुशियाँ लाए, समृद्धिशाली
बनाये एवं मनोकामनायें पूरी हों।

आदित्य आशा है आने वाले नये
वर्ष दो हज़ार छब्बीस में भी आप
सबकी मधुर आवाज की झनकार
ऐसे ही मेरे कानों में गूँजती रहेगी।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

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