
दी थी ये शुभकामना , देखो पिछली साल ।
फिर भी पूरे वर्ष भर , बुरा रहा मम हाल ।।१
खुद को तो बदला नहीं , बदल गया ये साल।
जो कुछ जितना है बहुत, क्यों होते बेहाल ।।२
जो संकल्प लिए आपने , त्याग दिए क्यों तात ।
आज दिसम्बर आखरी , अब काहे अकुलात ।।३
उतना ही भरिए प्रिय, दारु का ये गिलास।
सही सलामत पहुंच घर , करना पड़े तलाश।।४
अधिक अंग्रेजी बकत है , लास्ट दिसम्बर लोग ।
हैप्पी न्यू इयर कहते , करें पान अरु भोग ।।५
शामें तो गुजरी बहुत, लास्ट दिसम्बर शाम ।
ये ऐसी एक शाम है , साल बदलना काम ।।६
उम्मीदी गठरी बहुत , लाद लिए बेहाल ।
ऐसा मैं वह समय हूं , कहे लोग नव साल।।७
साल बदल हर हाल में , जाता है हर साल ।
साली यदि बदली अगर , हो जै हो बेहाल।।८
साल यही हर हाल में , मित्र करत बेहाल ।
चाल चरित्र बदले नहीं, उठते बहुत सवाल ।९
डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र




