सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, फतेहपुर में मासांत दक्षता वर्ग का सफल आयोजन

फतेहपुर, बाराबंकी।
दिनांक 29 दिसंबर 2025 को सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, फतेहपुर में मासांत अवसर पर आचार्यों की शैक्षिक दक्षता वृद्धि हेतु विशेष वर्ग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षण गुणवत्ता को सुदृढ़ करना तथा नवीन शैक्षिक दृष्टिकोणों से आचार्यों को अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री वीरेंद्र कुमार वर्मा द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के आदरणीय कोषाध्यक्ष श्री विजय कुमार जैन जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रथम सत्र में आचार्यों को शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत योग, आसन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया गया, जिससे शारीरिक एवं मानसिक स्फूर्ति का संचार हुआ।
इसके उपरांत प्रधानाचार्य एवं कोषाध्यक्ष महोदय द्वारा आगामी जनवरी माह में प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। विवेकानंद जयंती के अवसर पर पुरातन छात्र सम्मेलन तथा वसंतोत्सव पर विद्यारंभ एवं वेदारंभ संस्कार को विद्यालय में प्रवेशोत्सव के वृहद स्वरूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
उद्घाटन सत्र में प्रधानाचार्य श्री वर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कक्षा-कक्ष में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यार्थियों में स्थायी अधिगम के साथ मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का विकास संभव है। उन्होंने वर्तमान समाज में नैतिक मूल्यों के ह्रास पर चिंता व्यक्त करते हुए संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया तथा आचार्यों से निरंतर अध्ययनशील रहकर नवीन शैक्षिक ज्ञान को अपनाने का आह्वान किया।
इसके पश्चात विषयवार सत्रों का आयोजन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए पाठ योजना निर्माण पर विशेष चर्चा की गई। पंचपदीय शिक्षण पद्धति के पाँचों आयाम—अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रयास—को सम्मिलित कर प्रभावी पाठ योजना तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।
तैयार की गई पाठ योजनाओं के आधार पर प्रांतीय प्रशिक्षण प्रमुख श्री दिवाकर द्विवेदी द्वारा आदर्श अध्यापन का प्रदर्शन किया गया, जिससे आचार्यों को व्यवहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस सत्र में विद्यालय के समस्त आचार्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
समापन सत्र में प्रधानाचार्य श्री वीरेंद्र कुमार वर्मा ने अध्यापन में अधिकाधिक शिक्षण-अधिगम सामग्री (LTM) के प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि जीवंत, क्रियाधारित एवं तकनीक-संयुक्त शिक्षण से ही विद्यार्थियों का अधिगम अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी आचार्यों से नवाचारपूर्ण एवं गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाने का आग्रह किया।
यह मासांत दक्षता वर्ग आचार्यों के शैक्षिक उन्नयन एवं विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।

