
वक्त नया है, साल नया है.
सुन प्यारे ! अब, हाल नया है।
रीत पुरानी छोड़ चले अब
नया जोश है, ख्याल नया है।
रटे-रटाए उत्तर छोड़ो
देखो एक सवाल नया है।
गद्दा, तकिया चादर बदली,
यहाँ तक कि रूमाल नया है।
नफरत के सब रंग त्याग कर
लाया हूँ जो गुलाल नया है।
बन्द पुराना डायरी में सब
सुना रहा जो फिलहाल है।
डां० सन्दीप कुमार सचेत
सम्भल,उ०प्र०




