साहित्य

देश की धरोहर

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

देश धरोहर मानिए, संस्कृति का श्रृंगार।

पीढ़ी से पीढ़ी चले, इसका दिव्य प्रसार॥

 

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वरा, गूँजे प्रेम संदेश।

इनसे ही पहचान है, अपने भारत देश॥

 

गंगा, यमुना, पर्वतों, की अनुपम सौगात।

देश धरोहर बन गई, प्रकृति की यह बात॥

 

वीरों की गाथा अमर, त्याग भरा इतिहास।

देश धरोहर है यही, जग में जिसका वास॥

 

भाषा, वेश, परंपरा, अनुपम अमृतधार।

इनसे ही महके सदा, भारत का संसार॥

 

किला, महल, स्मारक सभी, गौरव की पहचान।

देश धरोहर हैं यही, बढ़ता जिनसे मान॥

 

ऋषियों का विज्ञान है, संतों का उपदेश।

देश धरोहर बन गया, अनुपम अपना देश॥

 

लोककला, संगीत, नृत्य, संस्कृति के हार।

देश धरोहर हैं सभी, रखिए इन्हें सँभार॥

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा “सुरभि”

मुजफ्फरपुर, बिहार

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